साहित्य का लेखन करने का शौक मुझे हमेशा से ही रहा है पर कभी शिक्षा, नौकरी, पीएच.डी. का काम तथा घर का काम इन सब में व्यस्त होने के कारण साहित्य लेखन के लिए उतना वक्त दे ना सकी जितना मेरा शौक है। अपने सारे कामों में से कुछ वक्त निकालकर मैंने साहित्य लिखने की कोशिश की है। काव्य कलियाँ इस काव्य संग्रह में दैनिक समाचार पत्र में प्रसिद्ध की गई मेरी कविताएँ है। घर का काम करते समय, कॉलेज में जाते-आते वक्त, पलभर में सूझी हुई यह कविताएँ हैं। हवा के झोंके की तरह यह कविता आती, मेरे मन पर प्रतिबिंब छोड़ती थी, फिर में वक्त मिलते ही उन कविताओं को कागज पर उतरती ।
कुछ लोगों के मोबाइल की स्टेटस में मैंने अपनी कविताओं को देखा तो मुझे यह एहसास हुआ कि, शायद मेरी कविताएँ उनको बेहद पसंद आ रही है उनके दिल को छू रही है मेरी कविताएँ सबके दिल को छू कर सिर्फ आनंद ना दें बल्कि उनके जीवन में अच्छा बदलाव हो जाए इसी उद्देश्य से मैंने अपनी कविताओं का संग्रह प्रकाशित करने के प्रयास किया है। मेरे पिताजी के जाने से मेरे दिल में हमेशा एक खालीपन रहता था, पर मेरी माँ ने माता-पिता यह दोनों भूमिकाएँ निभाई और मेरे हर सपने को साकार किया है। आज मैं सेट परीक्षा उत्तीर्ण होकर पीएच.डी. की उपाधि हासिल करने जा रही हूँ, वह सिर्फ मेरी माँ की तपस्या से ही। लेकिन आजकल समाज में माता-पिता का महत्व कम होता हुआ देखा तो मैंने माँ कविता लिखी। पीएच.डी. का काम करते वक्त किन्नर समुदाय से मिलने पर उनकी व्यथाओं को सुनकर कई बार आँखें भर आई। लोग उन्हें घृणा की दृष्टि से न देखें और उन्हें भी सम्मान मिले इसलिए मैंने किन्नर, थर्ड जेंडर कविताएँ लिखी है।
मेरी कविताएँ सबको भाएँ, पसंद आए तथा अच्छे सोच विचार की टोकरी मिले यह भावना व्यक्त करती हूँ। यह कविताएँ लिखते समय किससे के दिल को चोट ना पहुंचे यह कोशिश मेरी रही है। मेरी कविताओं से सबको आनंद की संतुष्टि हो, बस यही उम्मीद करती हूँ।
- प्रा. कु. अंजली सिद्राम जाधव
साहित्य का लेखन करने का शौक मुझे हमेशा से ही रहा है पर कभी शिक्षा, नौकरी, पीएच.डी. का काम तथा घर का काम इन सब में व्यस्त होने के कारण साहित्य लेखन के लिए उतना वक्त दे ना सकी जितना मेरा शौक है। अपने सारे कामों में से कुछ वक्त निकालकर मैंने साहित्य लिखने की कोशिश की है। काव्य कलियाँ इस काव्य संग्रह...
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